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एक अलग अंदाज़….
एक अर्से के बाद अपनी तन्हाई से रुबरु हो गये, ना उसने कुछ पूछा , ना हम बयां करने रुके ! ज़ींदगीकी की किताब आखरी पन्ने तक पलटते गये, जो जिया हमने, वोह गहराइ में लब्ज़ कहां उतर पाये ! तेर्री…