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चरित्र का निर्माण
यदि तुम अपनी गलतियों के नाम पर, घर जा कर सिर पर हाथ रख रोते रहोगे तो तुम्हारा उद्धार नहीं हो सकता. बल्कि उससे तुम और भी दुर्बल हो जाओगे. यदि कोई कमरा हज़ारों वर्षों से अंधकारपूर्ण हो और तुम उसमे जा …