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रामावतार त्यागी – कविता – एक भी आँसू न कर बेकार
एक भी आँसू न कर बेकार जाने कब समंदर माँगने आ जाए पास प्यासे के कुँआ आता नहीं है यह कहावत है अमरवाणी नहीं है और जिसके पास देने को न कुछ भी एक भी ऎसा यहाँ प्राणी नहीं है कर स्वयं हर गीत का श्रंगार जा…