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अशोक वाजपेयी – कविता – समय से अनुरोध
समय, मुझे सिखाओ कैसे भर जाता है घाव?-पर एक अदृश्य फाँस दुखती रहती है जीवन-भर. समय, मुझे बताओ कैसे जब सब भूल चुके होंगे रोज़मर्रा के जीवन-व्यापार में मैं याद रख सकूँ और दूसरों से बेहतर न महसू…