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वेदान्त का मर्म
यह उस समय की बात है जब स्वामी विवेकानंद 1898 में पेरिस में थे। उन्हें वहां एक इटालियन डचेस ने कुछ समय के लिए निमंत्रित किया था। एक दिन डचेस स्वामीजी को शहर से बाहर घुमाने के लिए ले गयी। उन दिनों मो…