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काश ! भूख न होती
पापी पेट के लिए करता हूं आज का तो हुआ इंतजाम कल के लिए हरदम डरता हुं तपते तन, सहमे डरे मन से नागा कभी कभी करता हुं भुख से करनी पड़ती मुलाकात जाडे़ में जब -जब ठिठुरता हुं…