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दरद देखा नही जाता
किसी की बदनसीबी पे । कमी, मजबूरी व गरीबी पे। कभी देख के बेरोजगारी। कभी भूख,कभी बीमारी। कभी मौत , कंही सौत तिल-तिल जीने की लाचारी । देख रुक जाते हैं कदम। रोती अखियां ,हा़ए! इतने गम । मेरी मान,…