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Hindi Poem on Demonetization: नोटबंदी पर कविता
बंद हुए है पाँच सौ हज़ार चारो तरफ है हाहाकार बैंक के आगे लगी कतार ए टी ऍम में भीड़ भरमार काला धन जिसका भरमार वो करो घोषित भरो आयकर गरीब अमीर व्यापार घर संसार सबपे है भारी नोटबंदी का विचार -अनुष्का सू…