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Hindi Poem on Time-Abhi baki hai
रेत का हाथों से फिसलने में वक़्त अभी बाकी है एक लहर गुज़री है दूसरी का लौट के आना अभी बाकी है कल जो गुज़रा था उसका कल लौट के आना अभी बाकी है बहुत दिन गुज़ारे हैं अश्क बहा कर फिर से मुस्कुराना अभी …