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Hindi Poem on Peacock Bird-Mor
खोलूँ जब पंख अपने और बरसात में नाचूँ ज़ोर ज़ोर हूँ मैं बड़ा चित्‍त चोर हाँ मैं हूँ मोर पक्षियों का मैं कहलाता हूँ राजा मुरलीधर के मुकुट को मैं ही सजाता हाँ मैं वही मोर हूँ…