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Hindi Love Poem – काँटे क़िस्मत में हो
काँटे क़िस्मत में हो तो बहारें आये कैसे जो नहीं बस में हो उसकी चाहत घटाये कैसे सूरज जो चढ़ता है करते है उसको सब सलाम ढूबते सूरज को भला ख़िदमत हम दिलायें कैसे वो तो नादान है समंद्र को समझते है तालाब कि…