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लड़की बाद में है और इंसान पहले है।
मुझे दुसरों की बात को बेमतलब वजन तभी देना होता है, जब मुझे साफ-साफ नहीं पता होता कि क्या ‘उचित’ है और क्या ‘अनुचित।’ देखो! ग़लत धारणाओं, संस्कारों, परवरिश के कारण मन बहुत हिंसक हो जाता है। भ्रम अनिव…