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परम ही प्रथम
ॐ ‘अनहद’ है | ॐ का मतलब है मौन | कर्मों के कारण होते हैं, निश्चित रूप से होते हैं | अकर्म का कोई कारण नहीं होता | प्रेम की यदि वजह बता पा रहे हो तो वजह के हटते ही, प्रेम भी हट जायेगा | जो कुछ कीमती…