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तुम्हारी प्रकृति है भूल जाना, और है स्वभाव भूलकर भी न भूल पाना
सोच-सोच कर सच तक नहीं पहुँच पाओगे। सोच-सोच कर नहीं समझ पाओगे। सतह पर जमी हुई धूल तुम्हें तुम्हारे केंद्र के माणिक तक नहीं पहुंचा सकती। ठीक उसी तरीके से सतही विचार तुम्हें आत्मा तक नहीं पहुंचा सकता;…