gyanbazi.blog
Food for the soul
आदमी बुलबुला है पानी का और पानी की बहती सतह पर टूटता भी है, डूबता भी है फिर उभरता भी है , फिर से बहता है ।। Gulzar शहर की हलचल के बीच में भी मेरी हर शाम ख़ामोश थी, कल पहाड़ों की शांति मे…