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देव दीपावली (त्रिपुरी पूर्णिमा), काशी
आज गलियों में गुज़रती इस भीड़ के संग आगे बढ़ते हुए, ऐसा लगा की गंगा जी इन गालियों में बेह रही है, और जा कर खुद में ही समा जाएंगी। मानो की, गली में यादव जी (जिनका खीरकदम लाजवाब है) को प्रणाम भी हम उ…