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डर
कल ही तो तुम, फिर मेरे सपने मे आई थी कुछ वादे, कुछ वफ़ा.. और ढेर सारे सपने लाई थी, उन सपनो को आसमा पर बिछा कर हमने उन्हे तारों से सजाया था..! उन ‘वादों’ को, उस पुरानी इमारत मे.. कितनी ब…