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भाव-जगत के श्यामल मेघ
श्यामल_मेघ सिर्फ़ गगनाच्छादित नहीं होते… वो अंतर आकाश में भी उमड़ते घुमड़ते हैं और जब भावनाओं की आर्द्रता पहुँच जाती है अपने क्रांतिक बिन्दु तक.. तो हो जाते हैं चश्मेनम …! और… तब …