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वो भी क्या दिन थे ग़ालिब, जब हम किसी और के लिऐ जिया करते थे। खुद की खुशी छोड़, किसी और के ग़म में समाया करते थे। ना जाने कहा से वो लहर आयी, हमारी कष्टी को आपसे दूर कर गयी। किनारे पे बारीश तो मौसम सुहा…