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कवियों का मिलन
सुना था कुछ शामें बीतती नहीं / ऐसी शाम से मिलना भी होगा/ ये / नहीं लगता था / सच कहूँ झूठ लगता था / “था” जब सामने आकर कहे कि मैं हूँ ! / वो पल ही इतिहास में दर्ज़ हो जाता है ……