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भूख - गुमनाम अंधेरा – Countercurrents
आधार ही क्या अब जीवन का अधार है आधार ही से क्या अब जीवन का संचार है बन्द किवाड़ो के पिछे से सुनाई पड़ती है सिसकती आहें