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एक सौ सोलह चाँद की रातें एक तुम्हारे काँधे का तिल (Ijaazat 1987)
फिक्र तौसवीं ने क्या कभी सोचा होगा कि उनकी कृति प्याज के छिलके का शीर्षक एक फिल्मी गीत के लिये एक रुपक का काम करेगा? पर ऐसा तो सदियों से सिद्ध होता रहा है कि जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि कवियो…