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आँधी (1975): तेरे बिना शिकवे न हों पर ज़िंदगी ज़िंदगी भी तो नहीं
दूर होने की कसक पुल बन जाती है अक्सर दिलों को क़रीब लाने को। पर अति निकटता के अहसासों की आँच जाने क्यों कभी कभी विलग कर देती है दिलों को। मानो संबंधों की ऊष्मा से घबरा जाते हों मन। प्रेम, फिर विवाह…