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एक रुका हुआ फैसला (1986): निष्पक्ष तार्किकता और न्याय की विजय
कवि दिनकर ने चेताया था कभी कहकर समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याध जो तटस्थ हैं समय देखेगा उनके भी अपराध पर दिनकर की चेतावनी को ज्यादातर नज़रंदाज़ ही किया जाता है। तटस्थता को तो छोड़ ही दें, लोग द…