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लकड़ी
कुछ खुरदरी सी लहरें हैं ये, कुछ लड़ती हुयी इनसे कश्ती ये, साहिल की ख़्वाहिश लिए, कभी साथी थी इसकी हवाएँ ख़ुशगवार, कभी धोखे से जिन्होंने चाहा डुबाना, एक झलक में रंग बदलते नाक़िस बादल, ना जाने क्या थ…