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पुराने पिटारे……
कुछ खोले हैं पुराने पिटारे मैंने, धूल जिन पर बना चुकी थी अपने मकान, परिंदों सी बनके उड़ी वो बंद हसरतें, वो यादें, वो कीमती लम्हे, कुछ खोले हैं पुराने पिटारे मैंने, वो गर्मी की दोपहरें, धूप मैं दौड़…