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ख्वाहिश…. 
ख्वाहिशों का बंद डिब्बा लिए, रोज़ निकलता हूँ अपने घर से, कोशिशें होती हैं की, कोई आज़ाद हो सके ख्वाहिश मेरी, सिक्कों की खनक मैं कोई मुस्कान सी आ जाती है, आज खुलेगा डिब्बा मेरा, फुर करके उड़ जाएगी आ…