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ये आज क्या हुआ ?
एक रोज जो ‘जिंदगी’ ने दी थी गवाही, मेरे ख्वाब के सच होने की आज जब पहुचा ‘अदालत –ऐ-जिंदगी’ मे तो , बयान से मुकरने लगी । सोचा था जो… ये हवाए , परवाज़ देंगी मुझे ‘मंजिल की दिशा’ मे आज जो उड़ान भरी तो , …