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तुझसे एक शिकायत है …
पहले जो कलियाँ खिलती थी कभी अब वो खिलती क्यूँ नही अब किसी खुशी से परिचय होता क्यूँ नही , रूत भी वही है , फिजा भी वही है मैं तो यहाँ हूँ पर मेरा अक्स और कहीं है । शायद वो तुझमे था समाया , जब मैंने…