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यही सर्वश्रेष्ठ परमार्थ (पुरुषार्थ) है।
यही सर्वश्रेष्ठ परमार्थ (पुरुषार्थ) है। संसार की कोई भी चीज केवल देखने भर को तथा कहने भर को ही हमारी है, आखिर में तो छूट ही जायेगी। जब चीज छूट जाय तब रोना पड़े, उसके वियोग का दुःख सहना पड़े उससे पह…