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ज्ञानवान का आत्मपद
ज्ञानवान आत्मपद को पाकर आनंदित होता है और वह आनंद कभी दूर नहीं होता, क्योंकि उसको उस आनंद के आगे अष्टसिद्धियाँ तृण के समान लगती हैं। हे रामजी ! ऐसे पुरुषों का आचार तथा जिन स्थानों में वे रहते हैं, …