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शीशे के टुकड़े से – हिन्दी कविता -Hindi Poem
शीशे के टुकड़े से निहारते हो खुद को कभी मन के आईने में झांक के तो देखो दौड़ते भागते आयेंगी खुशियाँ कभी दूसरों के लिये खुद को लुटा के तो देखो संवेदना का फूल हो खिलता जिस हृदय में उसको सुकून कैसे न म…