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बिना तीर, बिना खंजर के खून किये जाते हो
बिना तीर, बिना खंजर के खून किये जाते हो एक नज़र देखें क्या तुमको? दिसम्बर को भी जून किये जाते हो सामने जब आते हो, देखें तुमको या कुछ कह भी पाएं शायरी छोड़ो, हम तो खुद बोलना ही भूल जायें जो सुन ले त…