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कुछ लिखने का मन नहीं है-हिंदी कविता
कुछ लिखने का मन नहीं है.. फिर भी गुस्ताखी करती हूँ.. सोच का बर्तन नहीं है.. फिर भी शब्द भरती हूँ.. कुछ जाना है.. कुछ पहचाना है.. फिर भी विवरण भरती हूँ.. आप कहें तो एक बार क्या .. १०० बार फिर वही द…