ankushanand.com
कल तो जो यहीं थी » Ankush Anand 's Page
मिट्टी के से थे वो ख्वाब, तू जिनमें धागे बुन रही थी, वो जो नही है अब आज, कल तो जो यहीं थी, ग़म में है दुनिया सारी, बस मेरा गम जो कम है, कुछ मिल घुमिल कर तेरी यादें, मेरे ज़ख्मों पर मरहम है, टूट बिखर कर मैने चलकर, जिंदगी को है थाम लिया,... Read More