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The Discord - आंतरिक द्वंद » Poems » Ankush Anand 's Page
एक दिन, दोपहर में, मैं एक पगडंडी पर टहल रहा था, ख़यालों में जाने कौन से, बार बार ठोकर खा के संभल रहा था। तभी अचानक पीछे से, किसी ‘परिचित’ ने आवाज़ लगाई, आकर मेरे बगल में उसने, कहा “इतना क्यों सोच रहे हो भाई”। मैं हैरान सा अवाक खड़ा, उसकी ओर ताकता रहा, जानता... Read More