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आज और कल के बीच कहीं Happy New Year
तुम कहते हो की गुज़र गया पर मैंने थोड़ा बाँध लिया एक पोटली में गुड़ और रोटी के बीच कहीं मैंने कुछ सपने बोये थे इक ऐसी ही तारीख गयी थी तब भी गुज़रा था ऐसा ही कुछ तब भी कुछ और समेटा था अब देखूंगा कल सुब्…