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डर और उम्मीद (Fear and Hope)
आज की रात हवाओं के परों पर गिरती दिख रही है कोई परछाई… मुझे अँधेरे से डर नहीं लगता है. मगर ये जानता हूँ अंधेरों की परछाइयों को कितना वक्त लगता है… ढलने में, पिघलने में. नहीं कोई घर बना …