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बारिशों के नाम
बारिश की हरी सी ख़ुशबू, धुलती हुई यादों का माज़ी – एक शाम तुम्हारे सिराहने बैठ सारे अफ़साने, सारी नज़्में तुम्हारे तकिये के नीचे छुपा कर, बच्चों की बनाई काग़ज़ी कश्ती सा बह आया…