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लफ़्ज़ों के बाहिर Or لفظوں کے باہر
सोचा कि तुम्हें कभी लफ़्ज़ों के बाहिर भी ला कर देखूँ, लफ़्ज़ों की भीतर, तुम बे-उम्र से हो गए हो जैसे। वक़्त का, मौसमों का, कोई असर दिखता ही नहीं तुम्हारे चहरे पर । क्या कोई टोना-तंतर है लफ़्ज़ों मे…