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शायरी – 21
जीवन भर परिवार और समाज की उम्मीदों को उठाने वाले लोग जब चौथेपन की तरफ बढ़ते हैं तो अक्सर ही उन्हें रेगिस्तान के सूखे पेड़ की तरह उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। प्रस्तुत हैं इसी परिपाटी पर लक्षित चं…