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काव्य श्रृंखला – 18
भई, आज हमारा कल्लू चल पड़ा है टुन्नी को प्रपोज करने। आखिर भालेंटाइन बाबा का भक्त जो ठहरा। लेकिन क्या क्या हुआ उसके प्रेम की डगर पर। जानने के लिए पढ़ें आज की कविता – प्रोपोज डे और कल्लू का दर्…