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जब मेरे हाथ खली थे
कुछ सपने हक़ीक़त, कुछ जाली थे | मैं तब बर्बाद हुआ जब मेरे हाथ खली थे | एक साफ़ दिल लेकर कितने पाप हो गए, कितने नाज़ुक फूल, कितने क़ातिल माली थे | एक-एक करके वो हर लकीर ले गया | शायद, सारे मेरे अरमान खया…