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ए भारत वंश
अपने ही वस्त्र उतार अपने को नग्न बनाया, ए भारत वंश तूने क्या नाम कमाया | राम और गौतम की ये धरती बेच डाली, तेरा ओछापन देख अंतकाल भी शरमाया | जो रोशिनी से मिटा सकता था अँधेरा, उसे ही नेत्रहीन का बेटा फ़रमाया | फिर महाभारत शुरू हो गयी, ए भारत वंश तूने क्या … Continue reading ए भारत वंश