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सडके ~ Adi's Journal
मईकी भरी दोपहर में जब चलता हूं उन तपती, मैली सड़कोंपर मनमें ख़याल आता है कई हस्तियाँ चली होगी उम्र से लम्बी इन सड़कोंपर| कई सपने चूर होंके बिखरे होंगे इसकी धुंधलीसी गलियोंके हर मोड़ पर, किसीने उम्मीदकी किरणका हाथ थामे यहीसे मंज़िलकी और कदम बढ़ाया था| किसी मजनूने हसीं राज बांटे होंगे इसी नुक्कड़पे... Read More