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#Hindi #poem | Alfaaz dhoondhti hai
बहुत कुछ कहना चाहा था तुझसे, पर तू ने कभी हमें सुना ही नहीं, आज जब हम चुप हो चुके हैं, तो तू इस सन्नाटे में हमारे अलफ़ाज़ ढूंढती है, तुझे तो याद भी नहीं, तेरे रास्ते रोशन करने के लिए हम कितना जले हैं…