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बेटी तुझे क्यों जन्म दूँ - Kavyakosh - Hindi Poems
बेटी तुझे क्यों जन्म दूँ सुरक्षित नहीं अब तू इस धरा पर पहले से राक्षस घात लगाए बैठे हैं हूँ अबला इसलिए सक्षम नहीं कि रक्षा कर सकूँ तेरी क्योंकिं यहाँ खतरे में मेरी भी आबरू अगर तू आ भी गयी मेरी दहलीज पर तो ये नरभक्षी नोच डालेंगे तुझे तब देख न पाएंगी मेरी सहमी आंखें चीरहरण तेरा इन दरिंदों के हाथों अस्मिता तेरी सुरक्षित है तभी तक जब तक धरे न पाँव तू इस जमीं पर मेरी अजन्मी बेटी कहते सब हैं बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर जब आती है बेटी घर में खुशियों की सौगात लेकर न जाने Continue reading बेटी तुझे क्यों जन्म दूँ→