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डस ले, डस ले (हास्य-व्यंग) - Kavyakosh - Hindi Poems
डस ले, डस ले निभाकर धर्म कड़वा चौथ का पति-वता पत्नी सो रही थी चैन से सितारों की झिलमिल बारात को निहार रहा था चाँद अपने नैन से अधीर पति ने देखा पत्नी के पास कुंडली लगाए बैठी थी एक नागिन सोलह शृंगार में दुल्हन-सी सजी जैसे हो किसी नाग की सुहागिन ख़ुशी से पागल पति धीरे से बोला डस ले, डस ले, अच्छा अवसर है कोटि-कोटि नमन करता हूँ तुझे हे नागिन तुझे भला किसका डर है चुप कमीने, फुँकार कर बोली नागिन दीदी को चरण वंदना करने आयी हूँ कभी लगे न इसको तेरी बुरी नज़र नाग देवता Continue reading डस ले, डस ले (हास्य-व्यंग)→