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औपनिवेशिक दासता से निकलकर ही रंगमंच में भारतीय दृष्टि संभव - प्रो आशीष त्रिपाठी
दिल्ली। 'भारतेन्दु हरिश्चंद्र और रवीन्द्रनाथ टैगोर के प्रारंभिक प्रयासों के बाद हिंदी रंगमंच पर हबीब तनवीर ने 1954 में आगरा बाज़ार तथा 1958 में मिट्टी की गाडी के प्रदर्शन कर यथार्थवादेतर कल्पनापूर्ण...
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