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Tukde Tukde hum nahin, tumhara tootna mumkin hai
टुकड़े टुकड़े हम नहीं, तुम्हारा टूटना मुमकिन है – उमेश श्रिनिवसनयह जो बैर के पहाड़ खड़े किए हैं तुमनेसोचा होगा के हैं हिमालय से भी बुलंदहम नहीं जियेंगे इनके साए मेंनफ़रत के टुकड़े कर देंगेटुकड़े टु…